Hamare desh ka mahoul

अपने देश में ये जो सत्ता की खींच तान है इसमें कहीं ना कहीं अपने देश का नुकसान देखने को मिल रहा है और इसमें परेशान सिर्फ आम जनमानस है ऊपर बैठे सत्ता में मंत्रियों को यह देखने को नहीं मिलता उन्होंने जो कार्य योजनाएं बनाई है उसे सिर्फ फाइलों में सीमिट कर रह जाती है जमीनी हकीकत देखने को नहीं मिलती जिनका खामियाजा निचले स्तर पर जनता जनार्दन को भोगना पड़ता है ऊपर से तो धन आवांटित बहुत हुआ लेकिन जहां उसका काम होना है वहां सिर्फ बंटरबात के और कुछ नहीं हुआ अब यह चाहे भ्रष्टाचार का रूप हो या किसी न किसी रूप में सरकार की मिली जुली व्यवस्था इसके लिए हम किसको दोषी माने यह कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन हमारी मान्यता तो यही रहेगी कि अगर सरकार चाहे तो सब कुछ संभव है भ्रष्टाचार का निराकरण सरकार के ही बस में है 

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